Sunday, 13 December 2009

शराब और शराब

पिछला पूरा महीना शराब और शराबियों की संगत में कटा है और अक्सर शराब सेरिब्रल कोर्टेक्स तक ही पहुंची मगर कई बार भेजे में हिप्पोकाम्पस तक भी पहुंची और ऐसे हर मौके पर हर अभ्यस्त शराबी की तरह मैं भी खूब भावुक हुआ मगर अनुभव से ऐसे मौकों पर अंतर्मुखी होना सीख लिया है। इस बार इतना और किया कि ऐसे हर अवसर पर शराब के बारे में एक-एक लाइन जोड़ता रहा। ज़्यादा गंभीरता से लेने की हिदायत और जोड़ रहा हूँ इस बकवाद के साथ।

मास्टर अथर्व मेरी बोतल के साथ




-१-

शराबी हंसता है

शराबी रोता है

शराबी घिरा रहता है अवसाद में।



-२-

शीरीं छोड़ जाती है फ़रहाद को

लैला मजनूं को


शराब नहीं छोड़ती शराबी को

शराब ही सच्ची प्रेमिका है

जहान भर में



-३-

जाम भरता है

हलक़ में उतरती है शराब

शराबी देखता है अपने में भरता खालीपन



-४-

शराब पीकर मरता है शराबी

दूसरा शराबी ढूंढ लेती है शराब


शराब के लिये यकसां है सारे शराबी