Friday, 11 March 2011

उदास स्त्रियाँ

एक स्त्री डूब जाती है निराशा में
बीसियों उँगलियाँ टटोलने लगती हैं
उसके दिल में लगा सांत्वना का बटन
सुन्दर स्त्रियों को नहीं है अधिकार
उदास होने का
कोई अधिकार नहीं उन्हें
इतने लोगों को
अपनी उदासी से बरगलाने का
वह यह बात नहीं जानती
और हो जाती है उदास
उसे
इस दुराधिकार से
किया जाना चाहिए वंचित
अवैधानिक करार दिया जाना चाहिए
सुन्दर स्त्रियों की उदासी को
जैसे सुन्दर स्त्रियों की हँसी कम ही सुनाई पड़ती है
कम ही दिखाई देनी चाहिए उनकी उदासी

13 comments:

पारुल "पुखराज" said...

"कम ही दिखाई देनी चाहिए उनकी उदासी"

मुश्किल... मगर बढ़िया बात

प्रवीण पाण्डेय said...

कम ही दिखाई जाये वह उदासी।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

"कम ही दिखाई देनी चाहिए उनकी उदासी"

गहन अभिव्यक्ति..... विचारणीय पंक्ति

अपूर्व said...

’नाविक के तीर’ सरीखी कविताएं कह जाना आपकी खुसूसियत रही है..और छोटे-छोटे कंकड़ों से दिल-दरिया को थरथरा देने की शैली आपकी कविताओं को अक्सर बार-बार पढ़ने पर विवश करती है..यहाँ बसंत के सुर्ख गुले-ग़ुलाब का मुरझाया होना हमे पसंद नही आता..वहीं भटकटैया के फूल की पीली पंखुड़ियाँ कब तेज हवाएं उड़ा ले जाती हैं..यह हमें नजर तक नही आता..सो आपकी बात का लाजिकल होना समझ आता है..मगर आखिरी पंक्ति का मर्म पूरी तरह पकड़ पाने मे चूका हूँ..किसी चीज/भाव का अदृश्य होना उसका अनुपस्थित होना नही होता..मगर फिर भी किसी इन्टैंजिबल चीज के बारे मे कोई बात यकीनी तौर पे कैसे कही जा सकती हैं..फिर सुंदर स्त्री का उदास होना हमारे लिये इसलिये भी जरूरी है..क्योंकि यह उदासी हमें उसके प्रति अपनी चिंता दिखाने/फिक्र जताने का सुनहरा मौका भी देती है..खूबसूरत आंखों के आँसू पोछने के बहाने का सामीप्य-सुख परमानंद की कोटि मे ही आना चाहिये..यूँ भी एक हँसती हुई स्त्री को ठग पाना अपेक्षाकृत दुरुह होता है... :-)

वैसे खूबसूरत कविताएं भी अक्सर उदास क्यों होती हैं..यह भी सोचने की बात है..

ZEAL said...

किसी स्त्री की उदासी देख पाना इतना आसान भी नहीं ....

महेन said...

अपूर्व, टेंजिबल चीज़ों के बारे में यकीनी तौर पर कह देने भर से वे यकीनी लगने लगती हैं और कई बार खूबसूरत भी। जिसे आप परमानंद की कोटि में रख रहे हैं उसी पर मैं आघात कर रहा हूँ। किसी व्यक्ति के दु:ख पर यदि हमें मौकापरस्ती सूझती है तो इसमें गड़बड़ ही है। सुन्दर स्त्री पुरुष को अच्छी लगती है और अगर वह दु:खी भी हो तो और भी सुन्दर लगने लगती है।

Patali-The-Village said...

गहन अभिव्यक्ति|धन्यवाद|

mukti said...

कमाल है ! मुझे तो लगता है कि पुरुषों को उदास औरतें ही अच्छी लगती हैं और अगर वो खूबसूरत हों तो और खूबसूरत लगने लगती हैं उदास होने पर. मुझे तो लगता है कि हँसती हुयी औरत पुरुषों को डराती है. मेरी ये अकविता पढ़ियेगा...
http://feministpoems.blogspot.com/2010/12/blog-post_25.html
[मैं अपनी कविताओं को अकविता ही कहना पसंद करती हूँ क्योंकि मुझे कविता के शिल्प का बहुत ज्ञान नहीं है. बस बात कह लेती हूँ ]

Kajal Kumar said...

सुन्दर स्त्रियों की उदासी को
जैसे सुन्दर स्त्रियों की हँसी कम ही सुनाई पड़ती है
कम ही दिखाई देनी चाहिए उनकी उदासी


:)

प्रदीप कांत said...

कम ही दिखाई देनी चाहिए उनकी उदासी

काश स्त्री तो क्या
कोई भी न हो उदास

Anonymous said...

tangible = मूर्त?

महेन said...

नामरहित मित्र… आपका प्रश्न मेरे लिये था? मेरा अभिप्राय इन्टेन्जिबल से था… टेन्जिबल टाइपो था।

सुशील कुमार छौक्कर said...

जिन चीजों को आम आंखे देख नही पाती है, दिमाग... मगर आप... और कलम कह देती हैं... और मेरा जैसा पाठक निशब्द हो जाता है....इन उदासी और खूबसूरती के बीच...