Saturday, 19 February 2011

सन्नाटे में बेरंग तस्वीरें



पुराना पड़ रहा हूँ नए पानी के साथ



खाली बोतल उदासी का सबब है और आधी खाली हुई बोतल के बाकी हिस्से में उदासी छुटी रह जाती है…




गाय का गला या घर की दीवार, मेरे भीतर अनगिनत ध्वनियाँ हैं



रीत गया कुछ अभी बीता नही



तस्वीरों में रह गए लोग





होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे…


9 comments:

ZEAL said...

Lovely pics !

सुशील कुमार छौक्कर said...

किधर किधर हाथ मरोगे महेन भाई। कुछ हमारे लिए भी छोड दो। वैसे तस्वीरें शानदार और अति सुन्दर है। दिल खुश हो गया।

amit-nivedita said...

what an idea sir ji...very nice

डॉ .अनुराग said...

subhanallah!

Puja Upadhyay said...

So this is where you disappeared!
A world of monochrome...the pics are amazing!!

प्रवीण पाण्डेय said...

गजब की तस्वीरें।

निर्मला कपिला said...

सुन्दर तस्वीरें। धन्यवाद।

महेन said...

शुक्रिया मित्रो!
@ सुशील भाई, जगह जगह हाथ वो मारते हैं जो टिक कर कुछ कर नहीं सकते जैसे मैं।
@ पूजा, यह भी कभी कभी कर लेता हूँ मगर सचमुच ग़ायब हो जाने की यह वजह नहीं है।

ANIL YADAV said...

भौत खूब।