पुराना पड़ रहा हूँ नए पानी के साथ
खाली बोतल उदासी का सबब है और आधी खाली हुई बोतल के बाकी हिस्से में उदासी छुटी रह जाती है…
गाय का गला या घर की दीवार, मेरे भीतर अनगिनत ध्वनियाँ हैं
रीत गया कुछ अभी बीता नही
तस्वीरों में रह गए लोग
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे…
9 टिप्पणियाँ:
Lovely pics !
किधर किधर हाथ मरोगे महेन भाई। कुछ हमारे लिए भी छोड दो। वैसे तस्वीरें शानदार और अति सुन्दर है। दिल खुश हो गया।
what an idea sir ji...very nice
subhanallah!
So this is where you disappeared!
A world of monochrome...the pics are amazing!!
गजब की तस्वीरें।
सुन्दर तस्वीरें। धन्यवाद।
शुक्रिया मित्रो!
@ सुशील भाई, जगह जगह हाथ वो मारते हैं जो टिक कर कुछ कर नहीं सकते जैसे मैं।
@ पूजा, यह भी कभी कभी कर लेता हूँ मगर सचमुच ग़ायब हो जाने की यह वजह नहीं है।
भौत खूब।
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