Sunday, 15 November 2009

दूसरा प्यार

दूसरे प्यार में नहीं लिखी जाती
पहली अर्थहीन प्रेम-कविता
पहला थरथराता चुंबन
नहीं लेता कोई दूसरे प्यार में
दूसरे प्यार के बारे में
नहीं लिखता कोई अभिज्ञान
और ना ही होता है शिला-लेखों में उसका वर्णन

दूसरा प्यार नहीं रखा जाता छुपाकर
बटुए की चोर-जेब में
क्या तुमने सुनी है
कोई किंवदन्ति दूसरे प्यार के बारे में
या किसी राजकुमारी की कहानी
जिसे मिला हो दूसरा राजकुमार

दूसरे प्यार के बीच
होता है महा-राशि जल
और एक टूटा हुआ पुल
पहले प्यार की तरह
दूसरे प्यार में
नहीं होती ऐसी सड़क
जिसके दूसरे छोर पर कोई न हो

वास्तव में
दूसरे प्यार तक हो जाते हैं हम इतने व्यावहारिक
कि संभलकर चलते हैं सारे दांव
और दूसरा प्यार बना देता है हमें इतना बनिया
कि मुनाफ़ाखोर हो जाता है प्रेम

दूसरे प्यार का ढ़ोंग सिर्फ़ वो करते हैं
जो बार-बार पड़कर प्यार में
खो देते हैं उसका अर्थ
या वो बेचारे जिन्हे
मिला ही नहीं होता पहला प्यार