Wednesday, 27 May 2009

दीवार के उस पार

सँझा की बेला थी कल
कोई यूँ आ खडा हुआ देहरी पर
कि झट तुम्हारी याद से भीग गया मैं

विलंबित होता है तो खुद ही चला आता है
तुम्हारे बारे में सोचना और
कितना अप्रत्याशित होता है तुम्हें याद करना
मसलन पार्क की बेंच पर बैठे
गली के जवान होते बच्चे
मुझे देख अचकचाकर छुड़ा लेते हैं
एक दूसरे से हाथ
मुझे ध्यान हो आते हैं बीतते साल
और इन सालों में तुम्हारी अनुपस्थिति

तुम्हारे बारे में सोचना ऐसा होता है ज्यूँ
सांस के बारे में सोचते ही हमें महसूस होता है
छाती का उठना-गिरना और हम पाते हैं
इस बीच चलती रही है हमारी सांस

यूँ भी हुआ है कि घर की गैरज़रूरी चीज़ों में
तुम्हें पाया है मौजूद
और उन्हें दे दिया गया है ज़रूरी करार
कभी पुराने कुरते की जेब से निकल आया है
मेरा तुम्हारा एक पूरा प्रहसन भी

गर्मियों की विचलित करती शामों को
सुब्बुलक्ष्मी के गायन के बीच
तुम्हारे पसीने से उठने लगती थी महक
जिन सुदूर कोनों तक जाता था गायन
जहाँ जहाँ पहुँच पाती थी महक
उस परिधि में जड़ हो जाती थी हमारी उपस्थिति
आओ देखो, तुम पाओगी मुझे वे कोने टटोलते

अब सुब्बुलक्ष्मी को सुनना
उनके गायन का आस्वादन भर नहीं रह गया है
बल्कि तुम्हें खोजने का प्रयास बन चुका है

गोपनीय जो है तुम्हारा मेरा, उसमें भी
सेंध चुपके से मार लेती है नियति कभी

20 comments:

Tarun said...

park me to nahi lekin paharon ki sarakon ke kinaare baith baith ke hum bhi jawan hue hain.

Kavita ke bhav dekh ke keh sakta hoon subboo laxmi naam ka nasha abhi tak chara hai.....ye nasha aisa hi hai. Isi nashe ka ek aur pag charoonga bahut jald aapke rasaswadan ke liye.

ajay kumar jha said...

bahut khoob aapkaa andaaje bayaan aur shailee to ekdum judaa hai bhai.....likhte rahein.....ham padh rahe hain.....

Udan Tashtari said...

अब सुब्बुलक्ष्मी को सुनना
उनके गायन का आस्वादन भर नहीं रह गया है
बल्कि तुम्हें खोजने का प्रयास बन चुका है

गोपनीय जो है तुम्हारा मेरा, उसमें भी
सेंध चुपके से मार लेती है नियति कभी


-बहुत गहन रचना!!

poemsnpuja said...

यादों में सेंध मार कर बड़ी खूबसूरत कविता लाये हैं. बहुत अच्छा लगा पढना :)

मुकेश कुमार तिवारी said...

महेन जी,

किसी बिछुडे की खोज में दिन के रोजनामचे को व्यक्त करती कविता और बदलते हुये समय की जाजम पर वर्तमान को भूत से जोड़ती कविता, बहुत अच्छी लगी।

बधाईयाँ।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

डॉ .अनुराग said...

क्या कहूँ....फ़िदा हो गया हूँ इस कविता पर........गुम होने के बाद अगर ऐसी कविता लाने का वादा करते हो तो फिर गुम हो जाओ

सुशील कुमार छौक्कर said...

काफी दिनों के बाद प्रकट हुए लेकर एक प्यारी रचना, पढकर इतने खुश हुए हम, जैसे कोई बिछुडा साथी मिला हो।

अभिषेक ओझा said...

"गुम होने के बाद अगर ऐसी कविता लाने का वादा करते हो तो फिर गुम हो जाओ" नहीं भाई. मुझे पूरा भरोसा है कि इसके लिए गुम होने की जरुरत नहीं. थोडी फ्रीक्वेंसी तो बढा ही सकते हो आप.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

वण्डरफुल!
याद करने का मन हो तो कोई भी चीज याद करा देती है। मसलन यह कविता ही याद करा देती है जाने कितनी पुरानी बातें।

ravindra vyas said...

kaisi to mahak hai es pasine ki! pata nahin kahan kahan le jati hui,,,bawala banati hui!

woyaadein said...

भाव-विभोर कर डाला आपने तो....यादें सचमुच बहुमूल्य होती है, विशेषकर किसी अपने की.....मन के मीत की....

साभार
हमसफ़र यादों का.......

ओम आर्य said...

बहुत ही खुबसूरत रचना .......जो यादो मे दूर दूर तक ले गयी.

महामंत्री - तस्लीम said...

गोपनीय जो है मेरा तुम्हारा, नियति उसमें भी चुपके से सेंध मार लेती है।

बहुत खूबसूरत खयाल हैं। बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अनिल कान्त : said...

हमें आपकी कविता बहुत बहुत पसंद आयी

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

मुनीश ( munish ) said...

कभी पुराने कुरते की जेब से निकल आया है
मेरा तुम्हारा एक पूरा प्रहसन भी

गर्मियों की विचलित करती शामों को
सुब्बुलक्ष्मी के गायन के बीच
तुम्हारे पसीने से उठने लगती थी महक

Absolute magic ! Height ! Marhabaa!

स्वप्नदर्शी said...

nice one

प्रदीप कांत said...

गोपनीय जो है तुम्हारा मेरा, उसमें भी
सेंध चुपके से मार लेती है नियति कभी

bahut badhiya

रवीन्द्र दास said...

teri duniya me kitni aur duniya, jo badi mushkil.
kisi se lad k nikle ham, kisi pe lut k mar jaaye.
kahan ho bhai!

महेन said...

yuhin subh hoti hai yuhin shaam hoti hai,
yuhin umr tamaam hoti hai
ravindra bhai, bas filhaal laapataa hun, magar jaldi hi lautunga.

विजय प्रकाश सिंह said...

मन को छूने वाली कविता। ऐसी सुन्दर रचना पर हार्दिक बधाई । आगे भी इन्तज़ार रहेगा ।