Sunday, 28 December 2008

पैदा होने के अफ़सोस में

मेरे लिये 27 दिसंबर के बारे में पहली खास बात यह है कि इस दिन मिर्ज़ा ग़ालिब पैदा हुए थे और दूसरी यह कि उसी दिन मैं भी पैदा हुआ। वैसे तथ्यों का क्रम अगर चाहें तो बदल सकते हैं। इस बार 27 दिसंबर को यानि कल 34 वसंत देख लिये। ज़ाहिर है कि 34 में से कुछ तो पतझड़ भी रहे होंगे।

अपने से दस-दस साल छोटे लोगों के साथ काम करता हूँ तो लगता है "उम्र हो चली है" वाली अवस्था दूर नहीं है, मगर फिर सोचता हूँ Age is irrelevant if you are not a bottle of wine. उम्र का सवाल बड़ा पेचीदा है, तन बुढ़ाता है मगर मन नहीं बुढ़ाता। यह हर आदमी के साथ होता है मगर मेरे साथ तो ऐसा है कि तन भी नहीं बुढ़ा रहा। सिवाय कनपटी पर गिने-चुने सफ़ेद बालों के उम्र वही दस साल पीछे चल रही है। इससे फ़ायदे भी हुए हैं और नुकसान भी। दो फ़ायदे मैं कभी नहीं भूल सकता। पहला यह कि 2 अक्टूबर '94 को जब उत्तराखंड रैली के लिये हम लोग लालकिले गये और पुलिस के घेरे में फ़ंस गए तो बाकी सारे दोस्त तिहाड़ में एक हफ़्ता काटकर आए और उनके सिर पर केस भी डाल दिये गए मगर मुझे उस घेरे में से मेरे कमउम्र दिखने के कारण पुलिस ने भगा दिया। दूसरी बार जब फ़ौज के जवान कालेज के सारे दोस्तों की ट्रेन में ठुकाई कर रहे थे तो मैं किनारे बैठकर उनका पिटना देख रहा था।

जहां तक नुकसान की बात है पहली बार अठ्ठारह का होते ही जब मतदान का मौका मिला तो म्युनिसिपैलिटी के उस स्कूल में बरसों बाद घुसा जहाँ क ख ग सीखा था। अधिकारियों ने वोट डालने की आज्ञा ही नहीं दी। वे मानते रहे कि मैं फ़र्जी मतदान करने आया हूँ। अच्छे खासे हंगामे के बाद भी मैनें वोटर आई डी दिखाने से मना कर दिया क्योंकि वोटर आई डी उसी साल बनकर आए थे और उनका प्रयोग शुरु नहीं हुआ था। ड्यूटी पर एक मित्र न होता तो शायद पहला वोट देने से वंचित रह जाता। बाकी नुकसान जो हुए हैं, वे थोड़े निजी किस्म के हैं इसलिये…
पहली बार जब जन्मदिन जानने की जिज्ञासा हुई तो अपनी जन्मपत्री उठाई जो मुझसे भी लंबी निकली। तारीख का कुछ पता नहीं चला। फिर पिताजी की डायरी उठाई तो पता चला कि इतनी जल्दबाज़ी में धरती पर आया कि नए साल के आने का इंतज़ार भी न कर सका। उस उम्र में जन्मदिन पर बड़ा उत्साह रहता था। उत्साह तो अभी भी कायम है मगर उसपर थोड़ी थकान चढ़ गई है और यह भी भाव पैदा हो चला है कि जन्मदिन अपने को बरगलाने के लिये सबसे उत्तम दिन है और अपने को बरगलाने में मैं आज भी कोई कमी नहीं छोड़ता। सो शैंपेन की बोतल लाकर गटकता हूँ, ठाठ से उपहार स्वीकार करता हूँ। राजेश के यह कहने पर भी बाज नहीं आता कि, "पैदा होकर कौनसा तीर मार लिया?"
खैर यह जन्मदिन इसलिये खास था कि बेटे, जिसे अभी तक हम फुंटी कहकर ही काम चला रहे हैं, के साथ यह पहला था और अगर कहूँ कि वह खासा उत्साहित था तो झूठ होगा। उसे तो अभी भी अपने डाइपर गीले करने से फ़ुर्सत नहीं।




23 comments:

विवेक said...

सुंदर...

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा िलखा है आपने । मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है - आत्मिवश्वास से जीतें िजंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

Manoshi said...

आपका बेटा बहुत प्यारा है :-) और आपने बहुत अच्छा लिखा भी है। जन्मदिन की बधाइयाँ।

उन्मुक्त said...

जन्मदिन मुबारक।

सुशील कुमार छौक्कर said...

पैदा होके कौन सा तीर मार लिया? हाँ ये तो हैं मैं भी अक्सर यही सोचता हूँ। खैर जन्मदिन को ऐसे याद करना अच्छा लगा। वैसे अगली साल उपहार भी भेज देंग़े जी। आप केक भेजो या ना भेजो।

vijay gaur/विजय गौड़ said...

जन्मदिन मुबारक हो कंगारू।

ANIL YADAV said...

बधाई. वैसे खासे उम्र-चोर हो। फुंटी को एक टीका और।

नीरज गोस्वामी said...

जनम दिवस की बधाई....अभी आप बूढे होने की बात मत कीजिये क्यूँ की हम तो अठावन के होके भी जवान हैं...हा हा हा...बेटे को आशीर्वाद.
नीरज

नीरज गोस्वामी said...

जनम दिवस की बधाई....अभी आप बूढे होने की बात मत कीजिये क्यूँ की हम तो अठावन के होके भी जवान हैं...हा हा हा...बेटे को आशीर्वाद.
नीरज

नीरज गोस्वामी said...

जनम दिवस की बधाई....अभी आप बूढे होने की बात मत कीजिये क्यूँ की हम तो अठावन के होके भी जवान हैं...हा हा हा...बेटे को आशीर्वाद.
नीरज

PD said...

bahut pyara hai aapka bitva.. :)
aapko janmdin ki badhayiyan..

शिरीष कुमार मौर्य said...

मुन्ना बड़ा प्यारा !
पप्पा का दुलारा ! (क्योंकि उसी की गोद में हैं)
+++
और महेन प्यारे ये जानकर भी अच्छा लगा कि मै तुझसे पूरे पंद्रह दिन बड़ा हूं।

महेन said...

34 साले का बूढ़ा या 34 साल का जवान???
बधाइयों के लिये धन्यवाद सभी मित्रों को।
शिरीष भइये, फुंटी और फुंटी के मम्मी-पापा की ओर से हैप्पी बिलेटिड बड्डे टू यू!!!

ravindra vyas said...

ढेर सारी बधाई। और शुभकामनाएं।

Gyan Dutt Pandey said...

हम तो देर से पंहुचे, पर देर ही सही, बहुत बधाई जन्म दिन की। जन्म दिन बहुत यादें ले कर आता है। सभी संस्मरणात्मक भाव में आ जाते हैं।

sidheshwer said...

जन्मदिन मुबारक और..
नया बरस भी!

डॉ .अनुराग said...

महेन जी

देरी के लिए मुआफी.....वैसे आपका जन्मदिन हमने उस रोज एक शानदार wine के साथ अपने दोस्त के साथ उसी रोज मना लिया था ...हरियाणा बॉर्डर पे......आपके लिखने का अंदाज बेहद हसीन है....ओर खासा किस्सागोई भी......ओर हाँ नन्हे छुटकू के साथ जेकेट में फोटो झकास है........चीयर्स !!

poemsnpuja said...

badhai to usi din de di thi par post aaj padhi hai. aapka beta bahut pyaara hai. shirshak kaafi accha laga is post ka :)

अभिषेक ओझा said...

जन्मदिन की बधाई !
और देर का क्या कहें, हम तो अगले साल ही पहुचे !

और हाँ बेटे को आशीष, आशीष लिख कर लगता है... हम भी बड़े हो गए :-)

महेन said...

सभी मित्रों को धन्यवाद और नववर्ष की शुभकामनाएं!!!

runescape money said...

lol,so nice

intelligence said...

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Anonymous said...

:)