Saturday, 18 October 2008

हेरमान हेस्से की कविताएँ

नोबेल से सम्मानित जर्मन साहित्यकार हेरमान हेस्से मुख्य रूप से अपने तीन उपन्यासों सिद्धार्थ, स्टेपेनवौल्फ़ और मागिस्टर लुडी के लिये जाने जाते हैं मगर उन्होनें कविताएँ भी लिखीं और पेंटिंग्स भी बनाईं। उनका नाम पहली बार जर्मन सीखते हुए पढ़ा था। उस दौरान किसी ने (नाम याद नहीं) जर्मन-साहित्य का तेज़ी से हिन्दी में अनुवाद किया था, जिसे पढ़ने संयोग बन नहीं पाया, हालांकि शायद एक अनुवादित उपन्यास मैनें खरीदा भी था। एक दिन अचानक हेरमान की कुछ कविताएँ हाथ लग गईं जो मैनें तुरंत खरीदकर संभालकर फ़ुर्सत में पढ़ने के लिये रख लीं। पहली फ़ुर्सत, या यूँ कहें मूड कल ही हुआ और पढ़ते-पढ़ते तीन कविताओं के अनुवाद भी कर डाले। वही अनुवाद यहाँ दे रहा हूँ। मैं अनुवाद के मामले में अनाड़ी आदमी हूँ और अनुवाद का यह दूसरा ही प्रयास है इसलिये भूल-चूक माफ़।

1. सारी मौतें

मैं मर चुका हूँ सारी मौतें
और मरूँगा सारी मौतें एक बार फिर
पेड़ के भीतर लकड़ी की मौत
पहाड़ के भीतर पत्थर की मौत
मिट्टी की मौत रेत के भीतर
पत्तों के भीतर गर्मियों की चटकती घास की मौत
और खून से लथपथ बेचारे आदमी की मौत

मैं फिर जन्म लूँगा फूल बनकर
पेड़ और घास बनकर फिर जन्म लूँगा
मछली और हिरण, चिड़िया और तितली,
और हर रूप में
इच्छा ले जाएगी मुझे
उस अंतिम पीड़ा तक
मानव की पीड़ा तक

ओ कंपित तने हुए धनु
लालसा की प्रचंडता जब
जीवन के दोनों धुरों को
खींचेगी एक-दूसरे की ओर
फिर एक बार और कई कई बार
ढूँढ निकालोगे तुम मुझे मृत्यु से लेकर जन्म तक
स्रष्टि के पीड़ादायी पथ पर,
स्रष्टि के वैभवशाली पथ पर।

2. एलिज़ाबेथ

एक कहानी सुनाता हूँ तुम्हें,
बहुत रात हो चुकी है
क्या तुम मुझे सताओगी
प्यारी एलिज़ाबेथ?

मैं इसके बारे में कविताएँ लिखता हूँ
वैसे ही जैसे तुम;
मेरी पूरी प्रेम-गाथा
यह सँझा और तुम हो

दिक होकर
इन गीतों को मत फ़ेंक देना
जल्द ही तुम सुनोगी इन्हें
सुनोगी और कुछ नहीं समझ पाओगी।

3. कितने कठिन हैं…

कितने कठिन हो गए हैं दिन
कोई आग तपा नहीं पाती मुझे
सूरज हँसता नहीं मेरे साथ
सबकुछ सूना है
सबकुछ ठंडा और कठोर
प्यारे, स्वच्छ तारे भी देखते हैं मुझे
नीरसता से
जबसे मैनें दिल ही दिल में जाना
कि मर सकता है प्रेम।

15 comments:

Gyandutt Pandey said...

हरमन हेस्से की सेंसिटिविटी समझने को तो लगता है बार-बार पढ़ना पड़ेगा। आपके अनुवाद की समस्या नहीं है। शायद मेरी सोच में शुष्कता आ गयी है।

मैं कविता के मामले में अनाड़ी आदमी हूँ। :(

शिरीष कुमार मौर्य said...

हेरमान हेस्से को मै एक कथाकार के रूप में जानता था! तुमने कविताएं पढ़वाकर चौंकाया! एक सुखद आश्चर्य! अनुवाद की हिंदी भी चकाचक है! बढ़िया काम महेन !

Udan Tashtari said...

हरमन हेस्से पढ़कर अच्छा लगा. आपका आभार.

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत अच्छा लगा पढ़्कर।
मैं फिर जन्म लूँगा फूल बनकर
पेड़ और घास बनकर फिर जन्म लूँगा
मछली और हिरण, चिड़िया और तितली,
और हर रूप में
इच्छा ले जाएगी मुझे
उस अंतिम पीड़ा तक
मानव की पीड़ा तक

हम शायद ही विदेशी रचनाकारों को पढ़ पाते। अगर आप हमारा इनसे ऐसे परिचय ना कराते। आपका दिल से शुक्रिया।

ताऊ रामपुरिया said...

हरमन हेस्से के नावेल सिद्धार्थ पर एक फ़िल्म इसी नाम से १९७०-७१ के आसपास बनी थी ! इसमे सिमिग्रेवाल और रोमेश शर्मा ने काम किया था ! ये फ़िल्म देखकर उपरोक्त नावेल खरीदा था ! कालांतर में दुसरे भी पढ़े थे ! पर कविता का आज ही आपसे मालुम पडा ! भाई जर्मन तो नही आती अगर अंगेरजी/ हिन्दी में हो तो कृपया बताये की कहाँ से मगाई जा सकती है ! धन्यवाद !

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

धन्य्वाद इस प्रयास के लिये
- लावण्या

अभिषेक ओझा said...

हमने तो नाम ही पहली बात सुना... आभार ! 'सारी मौतें' अच्छी लगी... एक 'गांधीजी के जन्म दिन' पर नमक कविता पढ़ी थी... उससे कुछ मिलते हुए भाव लगे.

ravindra vyas said...

लगता नहीं कि अनुवाद किसी अनाड़ी ने किया है।

एस. बी. सिंह said...

लालसा की प्रचंडता जब
जीवन के दोनों धुरों को
खींचेगी एक-दूसरे की ओर
फिर एक बार और कई कई बार
ढूँढ निकालोगे तुम मुझे मृत्यु से लेकर जन्म तक
स्रष्टि के पीड़ादायी पथ पर,
स्रष्टि के वैभवशाली पथ पर।

बहुत बढिया। अनुवाद भी शानदार

महेन said...

अनुवाद पढ़ने और सराहने के लिये शुक्रिया।

रामपुरिया ताऊ हिन्दी में हेस्से की कविताओं का अनुवाद हुआ हो इसकी उम्मीद कम ही है। उनके पूरे काम को उनका उपन्यास सिद्धार्थ ही खा गया इसलिये बाकी काम बहुत ही कम हाईलाईट हो पाया है। मेरे पास जो कविताओं की किताब है वह आपको crossword में मिल जाएगी। पब्लिशर न्यू यार्क के Farrar, Straus and Giroux हैं। इस किताब में उनकी चुनिंदा कविताएं अंग्रेज़ी और जर्मन दोनो में हैं। अनुवाद जेम्स राइट का है।

sidheshwer said...

१-यह अच्छा रहा कि बता दिया कि किताब कहाँ - कैसे मिल सकेगी.

२-हेस्से की कवितायें पहली बार देखने को मिलीं.(यह मेरी ही कमी है.सकल पदारथ यहु जग माहीं..)

३-मेरे नितान्त निजी ख्याल से'अनाड़ी' ही अच्छे अनुवाद कर सकते हैं . 'होशियार' तो लगभग/शायद वही कर सकते हैं/करते हैं जो सिमोन की किताब के अनुवाद के सिलसिले में हुआ दीखता है!

४-नराई..अनदेखे दोस्त!

vijay gaur/विजय गौड़ said...

waah mahen. badhai bahut bahut.

सोनू said...

उस अनुवादक का नाम ढूंढ कर बताए जो जर्मन से सीधे हिंदी में अनुवाद करता है। एक तो अपने अमृत मेहता हैं,जो सार संसार चलाते हैं। एक किताब देखी थी हरमन की "चक्के तले" जो Unterm Rad का सीधा अनुवाद है, और उसके अनुवादक भी शायद मेहता ही हैं। मैं इन "सीधे" अनुवादकों की किताबों की तलाश में रहता हूँ।

महेन said...

सोनू भाई,
जिस अनुवादक की मैं बात कर रहा था उन्होनें 1999-00 के आसपास ये काम किया था और थोक में किया था जिसे शायद राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशिक किया था। याद धुंधली पड़ गई है। ठीक से कुछ कह नहीं सकता। राजकमल से पता करें तो शायद आपको पता चल सके। अगर दिल्ली में रहते हैं तो श्रीराम सेंटर बुक शाप पर चले जाएं वहा पता चल जाएगा। पता तो शायद DU और JNU से भी चल जाए मगर निर्भर करता है कि ये अनुवादक महोदय किस गुट के थे।

Ek ziddi dhun said...

महेंद्र भाई अनुवाद बहुत अच्छाहै। कोई बाधा नहीं एक-एक लाइन सीधे उतरती जाती है पूरी भावप्रवणता के साथ. पढ़कर कुछ उदास भी हो गया हूं।