Saturday, 6 September 2008

तुम्हारी याद से डरता हूँ

कल यूंही तुम्हारी भटकी हुई सी याद आ गई
मैनें डरते-डरते तुम्हारे बारे में सोचा
मेरी परिधि के बाहर जो दुनिया है
उसमें गए तुम्हें
लम्बा अरसा बीता
मगर अनुभव से जानता हूँ
पीड़ा स्मृति सापेक्ष है
तुम अब भी जब-तब
कोंपल सी फूट पड़ती हो
मेरे दुर्दान्त निर्जन में
कुहासे सी फैल जाती हो
क्या प्रत्याशा का अतिरेक अब भी है?
तुम्हारे साथ रहकर भी मेरा युद्ध
तुम्हें पा सकने का रहा
और अब तक चल रहा है
तुम्हें भूल पाने का खेल
तभी डरता हूँ
तुम्हारे बारे में सोचने से
जाने कब
अपनी पराजय के सम्मुख
फिर छोटा पड़ जाऊँ
और अगर झांकना भी पड़े
उस खिड़की के बाहर
तो बस यूँ
जैसे बरसों पहले
अधपढ़ी कोई किताब

14 comments:

Arun Aditya said...

गहरे भाव। सहज अभिव्यक्ति।

मीत said...

बहुत सुदर.

"मगर अनुभव से जानता हूँ
पीड़ा स्मृति सापेक्ष है
तुम अब भी जब-तब
कोंपल सी फूट पड़ती हो
मेरे दुर्दान्त निर्जन में
कुहासे सी फैल जाती हो
क्या प्रत्याशा का अतिरेक अब भी है?"

वाह !

अफ़लातून said...

कुछ अपनापन है ।

अभिषेक ओझा said...

"जैसे बरसों पहले
अधपढ़ी कोई किताब"

ऐसी यादों से डर लगे भी तो, उत्सुकता ख़त्म नहीं होती. अजीब द्वंद्व भरी उत्सुक अधूरी यादें हैं... अपने साथ भी कुछ ऐसी यादें हैं.

Parul said...

तुम्हारे साथ रहकर भी मेरा युद्ध
तुम्हें पा सकने का रहा
और अब तक चल रहा है
तुम्हें भूल पाने का खेल
khuub ..koi yaad aa gayaa!!

Gyandutt Pandey said...

ओह मैं अनुभव से जानता हूं
पीड़ा स्मृति एक आदत है।
जो अवसाद को जन्म देती है और अवसाद से पुष्ट हो
होती जाती है पुख्ता
इससे मुझे बहुत भय लगता है!

संगीता पुरी said...

बहुत ही अच्छा।

शोभा said...

वाह बहुत सुन्दर लिखा है। बधाई

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन!! बधाई.

निवेदन

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कृप्या दूसरों को पढ़ने और टिप्पणी कर अपनी प्रतिक्रिया देने में संकोच न करें.

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-समीर लाल
-उड़न तश्तरी

विनय said...

ये कविता लिख कर आप कितने मुक्त हो गए होंगे?
कविता अच्छी लगी
सपाट-बयानी भी
जो शायद टिप्पणी से हट गई है

सोतड़ू said...

मेरे प्यारे दही...
तू महान न हो जाए कहीं- सुकरात, ग़ालिब की तरह... (यूं ही लिख दिया- दिल से मत लियो)

मुझे पसंद आई- क्यों पता नहीं चलता

poemsnpuja said...

khoobsoorat hai. yaad aise hi bhatakti huyi aa jaati hai, us yaad se darna bhi khoobsoorat hai.

poemsnpuja said...

khoobsoorat hai. yaad aise hi bhatakti huyi aa jaati hai, us yaad se darna bhi khoobsoorat hai.

पारुल "पुखराज" said...

maai aaj ye poora blog palatne lagi huun..kuch padha mila ..bahut kuch anpadha ...KHOOB