Wednesday, 23 July 2008

हज़ारों मील की दूरी नहीं

हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच
तुम्हारी आवाज़ में तुम्हारा चेहरा तो देख सकता हूँ
शब्दों के कंपन पर थाम सकता हूँ तुम्हें
अपने ठंडे हाथों में

हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच
तुम्हारे मेरे बीच गिरजे हैं, मदिरालय हैं
चिकनी सड़कें, खूब सारी घास, अनंत नीला पानी है
तुम्हारे मेरे बीच साथ बिताए दिन हैं
अच्छे दिनों की यादें है तुम्हारे मेरे बीच
बुरे दिनों के दुस्वप्न हैं
फ़िर भी हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच
तुम्हारे मेरे बीच गर्भ में पलता एक शिशु है
जो जोड़ता है हमें एक दूसरे से
जीवन के यकीन से
ईश्वर के मनुष्य पर विश्वास से
इसलिये हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच

8 comments:

सुशील कुमार छौक्कर said...

महेन जी, किस सिददत से याद किया हैं। दिल खुश कर दिया।

तुम्हारे मेरे बीच गर्भ में पलता एक शिशु है
जो जोड़ता है हमें एक दूसरे से
जीवन के यकीन से
ईश्वर के मनुष्य पर विश्वास से
इसलिये हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच

शब्दों से भीगो दिया। दोस्त आपकी रचना पढकर मेरे पास शब्दों की कमी पड जाती हैं।

pallavi trivedi said...

तुम्हारे मेरे बीच गिरजे हैं, मदिरालय हैं
चिकनी सड़कें, खूब सारी घास, अनंत नीला पानी है
तुम्हारे मेरे बीच साथ बिताए दिन हैं
अच्छे दिनों की यादें है तुम्हारे मेरे बीच
बुरे दिनों के दुस्वप्न हैं
फ़िर भी हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच

bahut hi khoob ...sundar likha hai.

अनुराग said...

हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच
तुम्हारी आवाज़ में तुम्हारा चेहरा तो देख सकता हूँ
शब्दों के कंपन पर थाम सकता हूँ तुम्हें
अपने ठंडे हाथों में........

एक अजीब सी खासियत है आपके लिखे में ,जो मुझे हमेशा खीच लाती है ओर मै कभी निराश नही होता.....एक बार फ़िर लाजावाब...

अभिषेक ओझा said...

"फ़िर भी हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच"

भाई, यही एक लाइन सब कुछ कह गई!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच
तुम्हारी आवाज़ में तुम्हारा चेहरा तो देख सकता हूँ
शब्दों के कंपन पर थाम सकता हूँ तुम्हें
अपने ठंडे हाथों में

वाह सो रोमांटिक बेहद बेहद प्यारी दिल को छु ले ने वाली है यह पंक्तियाँ और पूरी rachana आपका ब्लॉग सही बुक मार्क किया है मैंने :)

Gyandutt Pandey said...

एक क्षीण यादों की डोर बहुत है दूरी पाटने को!

Udan Tashtari said...

जो जोड़ता है हमें एक दूसरे से
जीवन के यकीन से
ईश्वर के मनुष्य पर विश्वास से
इसलिये हज़ारों मील की दूरी नहीं तुम्हारे मेरे बीच

--बहुत उम्दा...वाह!

बाल किशन said...

वाह!
सुंदर रचना एवं गहरे भाव
बधाई.