Friday, 27 June 2008

मौसम

यहाँ मैं
ठिठुरते नीले जाड़े में
तुम्हारे माथे की गरमी सेंक रहा हूँ

वहाँ तुम
पीली उबलती धूप में
मेरी आँखों की नमी पी रही हो

पाँच हज़ार मील का सफ़र
मौसम कर रहा है तय

5 comments:

advocate rashmi saurana said...

bhut khub.likhate rhe.

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह जी वाह क्या बात है। मौसम(प्यार)हो तो ऐसा हो। महेन जान निकाल के ही मानोगे।

काकेश said...

पांच हज़ार मील का सफर
बस युँ ही तय हो जायेगा
जब मेरा दिलवर
मेरे लिये
सपनों की सेज सजायेगा.

बाबुषा said...

अच्छी लगी.

Mired Mirage said...

वाह!
घुघूतीबासूती