Saturday, 28 June 2008

जब एकांत उदास हो जाता है

फ़र्श पर खिड़की के पैताने बैठ
बाहर उड़ती हरियाली और जड़ पड़े पेड़ों को देखता हूँ
जब भी लगता है तुम्हारी याद चली आएगी
दीवारें सटा लेता हूँ कन्धे और पीठ से
मेरा एकांत उदास हो जाता है
कमरे में रौशनी मद्धिम पड़ने लगती है
गिलहरी नहीं लोटती मेरी छाती पर
ना ही टहनियों पर दौड़ती है
गाड़ियों की सरसराहट बहुत दूर जाने लगती है
पार्क में उठती बच्चों की किलकारियाँ मूक हो जाती हैं
ऐसी बोली सोचने लगता हूँ
जिसे समझने में कई साल लगेंगे अभी
ऐसे में डबडबाती एक बूँद खून की
डूबती आँखों में उतारकर
लिखने बैठता हूँ तुम्हारी याद का रोजनामचा
मगर कई बार यूँ हुआ है
सूख गयी है याद से भी पहले वह बूँद

9 comments:

चश्म-ए-बद्दूर said...

कविता तो अच्छी लगी लेकिन यूं मैं में लीन होने से बचना चाहिए.

दीपक भारतदीप said...

आपकी कविता बहुत भावनापूर्ण है। इससे मेरे कवि मन में भी कुछ शब्द लिखने का मन आया और लिख कर आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। सच है कवि मन हमेशा कुछ न कुछ कहना चाहता है। इसे मैं अपने ब्लाग पर लिखूंगा। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
दीपक भारतदीप
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जब याद आती है अकेले में किसी की
खत्म हो जाता है एकांत
जिन्हें भूलने की कोशिश करो
उतना ही मन होता क्लांत
धीमे-धीमे चलती शीतल पवन
लहराते हुए पेड़ के पतों से खिलता चमन
पर अकेलेपन की चाहत में
बैठे होते उसका आनंद जब
किसी का चेहरा मन में घुमड़ता
हो जाता अशांत

अकेले में मौसम का मजा लेने के लिये
मन ही मन किलकारियां भरने के लिये
आंखे बंद कर लेता हूं
बहुत कोशिश करता हूं
मन की आंखें बंद करने की
पर खुली रहतीं हैं वह हमेशा
कोई साथ होता तो अकेले होने की चाहत
अकेले में भी यादें खत्म कर देतीं एकांत
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अशोक पाण्डेय said...

इतनी भावपूर्ण कविता तो एकांत को उदास कर ही देगी।

सुशील कुमार छौक्कर said...

जब भी लगता है तुम्हारी याद चली आएगी
दीवारें सटा लेता हूँ कन्धे और पीठ से

इतनी दर्द भरी रचना लिख डाली।

neelima sukhija arora said...

bahut udas hai aapka ekant, koshish kariye is ekant mein bhi khushi milegi

Udan Tashtari said...

घनघोर उदासी छाती है, जब दूर कहीं खो जाती हो...

-बड़ा ही उदास मंजर है जनाब! सफल रहा लेखन अपने भाव कहने में. बधाई.

Mired Mirage said...

बहुत सुन्दर ! बहुत उदास पर बढ़िया।
घुघूती बासूती

Parul said...

दीवारें सटा लेता हूँ कन्धे और पीठ से....kya kahaa jaaye? bahut acchha hai..

अभिषेक ओझा said...

उदासी.. एकाकीपन.. एकांत. ये भी खुबसूरत हो सकते हैं... बहुत अच्छा लिखा भाई.