Monday, 9 June 2008

दूसरा प्यार

दूसरे प्यार में नहीं लिखी जाती
पहली अर्थहीन प्रेम-कविता
पहला थरथराता चुंबन
नहीं लेता कोई दूसरे प्यार में
दूसरे प्यार के बारे में
नहीं लिखता कोई अभिज्ञान
और ना ही होता है शिला-लेखों में उसका वर्णन

दूसरा प्यार नहीं रखा जाता छुपाकर
बटुए की चोर-जेब में
क्या तुमने सुनी है
कोई किंवदन्ति दूसरे प्यार के बारे में
या किसी राजकुमारी की कहानी
जिसे मिला हो दूसरा राजकुमार

दूसरे प्यार के बीच
होता है महा-राशि जल
और एक टूटा हुआ पुल
पहले प्यार की तरह
दूसरे प्यार में
नहीं होती ऐसी सड़क
जिसके दूसरे छोर पर कोई न हो

वास्तव में
दूसरे प्यार तक हो जाते हैं हम इतने व्यावहारिक
कि संभलकर चलते हैं सारे दांव
और दूसरा प्यार बना देता है हमें इतना बनिया
कि मुनाफ़ाखोर हो जाता है प्रेम

दूसरे प्यार का ढ़ोंग सिर्फ़ वो करते हैं
जो बार-बार पड़कर प्यार में
खो देते हैं उसका अर्थ
या वो बेचारे जिन्हे
मिला ही नहीं होता पहला प्यार

6 comments:

Udan Tashtari said...

बढ़िया है, जारी रहिये. लिखते रहिये.

सुशील कुमार छौक्कर said...

पहला थरथराता चुंबन, नही लेता कोई दूसरे प्यार में। लगता है प्यार में PHD किया हुआ। यार पहला प्यार हो या दूसरा प्यार। ऐसा क्यों होता कि उसे बटुए की चोर जेब में रखना पडता है? और हाँ आज का ब्लोग ब्लोगवानी पर नजर आया। यहाँ आपके लेखन का जादू ज्यादा लोगो तक पहुँचेगा। पर चिटठाजगत में नही ऐसा भी ना होना चाहिए। आज का ब्लोग चिटठाजगत में नही है।

अभिषेक ओझा said...

सुशील जी ने सही कहा आप प्यार में phd किए लगते हैं :-)

ab inconvenienti said...

माहेन जी, गहरे मन की अनुभूतियों से जन्मी लगतीं हैं आपकी कवितायें, अवाक् रह जाना पड़ता है पढ़ कर.
और अमां यार सुशील मियां, गज़ब कर रिये हो, अब पहले प्यार की फोटू फ्रेम करा के कोई ड्राइंग रूम में तो नहीं टान्गेगा न, वालेट के चोर जेब में में ही जिंदगी भर उसे जगह देगा, बल्की असल मज़ा तो उस फोटू को जिंदगी भर चोर जेब में छिपाये रखने में ही है.

poemsnpuja said...

behtarin...wakai ham pahle pyaar ke baad vyavaharik ho jaate hain, pyaar ko nibhane lagte hain, koshisein karte hain pyaar ko banaye rakhne ka jabki pahla pyaar nirbadh gati se bahta jaata hai.

शचीन्द्र आर्य said...

पता नहीं यह क्या है?
पर प्यार सिर्फ़ गिनती नहीं है, किसी गणितज्ञ का कोई चिन्ह भी नहीं। प्यार सिर्फ़ प्यार है। एक अनुभूति। सिर्फ़ उनके लिए नहीं, जिन्हे प्यार नहीं मिला। जो इसके बाहर है, वह सिर्फ़ बनिया के चिल्लर।